उदय सिंह
भारत में पान (ताम्बूल) खाने के बहुत शौकीन हैंं, लेकिन बनारस में पान खाने की दीवानगी है। कुछ लोग सुबह पान का ही नाश्ता करते हैं। कह सकते हैं कि यहां हर चौथा या पांचवां व्यक्ति पान खाने का लुत्फ उठाता है। पक्का बनारसी मुंह में पान की गिलोरी दबाकर आप से यूरोप और अमेरिका की राजनीति व संस्कृति के बारे में कुछ चुनिंदा गालियों के साथ ऐसे बात करेगा जैसे अभी-अभी वहां से लौटकर आया है। कहते हैं बनारस में गालियों का अपना अलग सौंदर्यशास्त्र है। यहां पान खाना शौक नहीं, शान है। पान की शान में कई जुमले मशहूर हैं। पान से मुंह की सुंदरता बढ़ती है। तन-मन सुगंधित और शुद्ध होता है। लेकिन इसकी कीमत यहां की दर-ओ-दीवार को चुकानी पड़ती है। शहर की शायद ही कोई ऐसी इमारत होगी जहां पान के पीक की बौछार न हुई हो।
अपने देश में पान खाकर कहां थूूका जाए कहां नहीं इस पर कोई ठोस कानून नहीं है। हाँ मुगल बादशाह और नवाबों के साथ पीकदान ज़रूर चलता था। कुछ साल से पहले दुबई में सरकार ने पान या पान के पत्तों के आयात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था। गोवा ने करीब 15 साल पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम के तहत पान और गुटखा पर प्रतिबंध लगा दिया था। देश के कुछ अन्य राज्यों ने भी इसी अधिनियम के अंतर्गत प्रतिबंध लगा दिया है। बावजूद इसके पान व गुटखा की बिक्री बेरोकटोक होती है।
दक्षिण एशियाई देशों में पान अधिक मिलता है। हालांकि पान का उद्भव स्थल मलाया द्वीप को माना जाता है। इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इसके औषधीय गुणों की शास्त्रों, पुराणों से लेकर रीतिकालीन कवियों और सिनेमा में भी बड़ी प्रशंसा मिली है। भारतीय इतिहास एवं परंपरा से इसका गहरा जुड़ाव है। अभिनेता अमिताभ बच्चन, आमिर खान या फिर करीना कपूर सब बनारस आने पर पान का शौक फरमाते हैं। पान खाने की प्रथा हिंदू-मुसलमान दोनों में बिना भेदभाव के समान रूप प्रचलित है। विटामिन सी, थायमिन, नियासिन, राइबोफ्लेविन, कैरोटीन और कैल्शियम काफी मात्र मिलता है। पान की महिमा अतंत है।
Bahut Badiya 👌👌
ReplyDeleteबढ़िया बहुत बढ़िया
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