Wednesday, 24 November 2021

वस्तु में अनावश्यक का निष्कासन ही कला है


 उदय सिंह

मैं कला मर्मज्ञ नहीं हूं। न ही कलाकृतियों का समीक्षक या विश्लेषक, जो पेंटिंग के रंग, रेखाओं, रहस्यमयी दृश्य और उसके बिंब प्रतिबिंब जैसे तत्वों को प्रतिध्वनित करने वाले गूढ़त्व को आसानी से समझ सकूं, लेकिन उसे जानने और आत्मसात करने की जिज्ञासा जरूर है। कला, अपने समय की सौंदर्यशास्त्र, विचारधाराओं, नैतिकता, दर्शन, राजनीति और सामाजिक रीति-रिवाजों को जानने का उपयोगी माध्यम है। 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में एक पाब्लो पिकासो आज ही के दिन यानि 25 अक्टूबर 1881 को दक्षिणी स्पेन के मैलागा, अंडालूसिया शहर में पैदा हुए थे, लेकिन अधिकांश जीवन फ्रांस और इटली में बिताया। वह असाधारण कलात्मक प्रतिभा के धनी थे, जिन्हें उपलब्धियों के लिए सार्वभौमिक प्रसिद्धि मिली। 

प्रतीकवाद से प्रेरित पाब्लो पिकासो का कहना था कि "मैं वस्तुओं के चित्र वैसे बनाता हूं जैसा उनकी कल्पना करता हूं, न कि वैसा जैसा मैं उन्हें देखता हूं। हर वह चीज वास्तविक है जिसकी तुम कल्पना कर सकते हो। दरअसल वस्तु में अनावश्यक का निष्कासन ही कला है"। उनकी पेंटिंग में अतियथार्थवाद की विशेषताएं होती हैं। संदर्भ और शैली अनूठे रूप में है। जिसमें ज्यादातर चित्रों में गरीबों की पीड़ा और थकान का चित्रण है। कुछ ऐसी भी हैं जो सबसे महंगी पेंटिंग में शुमार हैं। "फेम्स डी अल्जीर" 179.4 मिलियन डॉलर और "गारकोन ए ला पाइप" 104 मिलियन डॉलर में बिकने का रिकार्ड है। "द ओल्ड गिटारिस्ट" पाब्लो पिकासो की महान चित्रकला नमूना है।

पिकासो की सैकड़ों पेंटिंग में न जाने क्यों "द ओल्ड गिटारिस्ट" ही मुझे सर्वाधिक आकर्षक लगती है। इसमें एक बुजुर्ग संगीतकार को दिखाया गया है, जो बार्सिलोना, स्पेन की गलियों में अपने गिटार पर टिका हुआ है। एक भिखारी है। कुछ और चित्रकार हैं जो मुझे बेहद पसंद हैं, इसमें शीर्ष पर विन्सेंट वॉन गॉग नाम है। वह विलक्षण कलाकार थे। उनकी चित्रकला
जिजीविषा और वेदना का प्रतिनिधित्व करती है। ज़िंदगी की जद्दोजहद बताने में वॉन गॉग सबसे निराले थे।  लियोनार्डो दा विंसी, क्लॉड मोनेट, माइकल एंजेलो, जोहान्स वर्मीर, मोनेट और फ्रीडा कैहलो के चित्र में भी मानसोत्पन्न वस्तुस्थिति व सम्पूर्णता झलकती हैं। कला का सबसे मौलिक महत्व सजावट के रूप में नहीं बल्कि बौद्धिक संचार के एक मार्ग के रूप में है। दृश्य द्वारा प्रदान किया गया आनंद संततवाही होता है। अपने आप में अद्भुत और स्वीकार्य प्रेरणा है।

पिकासो की द ओल्ड गिटारिस्ट पेंटिंग को आज भी शिकागो के आर्ट इंस्टीट्यूट में प्रतिदिन हजारों लोग देखते हैं। इसकी कीमत करोड़ों डॉलर है। कुछ लोगों का मानना है कि यह पेंटिंग कभी नहीं बिकेगा, क्योंकि यह अनमोल है। कहा जाता है कि पिकासो ने करीब 12,000 चित्र बनाये थे। उन्होंने विश्व युद्ध की उथल-पुथल, क्लेशातुर चीखती चिल्लाती महिलाएं और भयावह मंज़र को अपनी कलाकृतियों के जरिये उन्मदिष्णु नाजीवाद-फासिज़्म को दिखाया है। इसके लिए कई बार उन्हें अराजकतावादियों के विरोध का भी सामना भी करना पड़ा। कला जो कभी रूढ़िवादी समय में बौद्धिक रूप से चुनौतीपूर्ण हुआ थी, अब मुख्यधारा की संस्कृति का हिस्सा है। 8 अप्रैल 1973 को यह महान चित्रकार दुनिया से विदा हो गया।

Source:- 

World art(the essential illustrated history)

Magazine:- the great artists

http://www.atelier-rc.com

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