Wednesday, 23 February 2022

घूंघटे में चंदा है,हिजाब पर हंगामा


उदय सिंह

चन्द्रगत भारती की एक कविता है।

अंधेरों की हुकूमत में

अभी तक जी रहा था मैं,

हटाया चांद ने घूंघट तो

उजाला हो गया घर में।

और वफ़ा बराही का एक शेर है।

रुख़-ए-आरज़ू पर हिजाब-ए-मोहब्बत

खिला और इस से शबाब-ए-मोहब्बत।

सिवा यास के मैं ने देखा न कुछ भी

उठाई जब उस ने नक़ाब-ए-मोहब्बत।

घूंघट और हिजाब की शान में ऐसे ही हजारों कविताएं, शेर और गीत लिखे गए हैं, जिसे महिलाओं के लिए अनुशासन और सम्मान का प्रतीक माना गया है। इन दिनों हिजाब पर हंगामा बरपा है। हिजाब पहना सही है या गलत यह विमर्श का विषय है। व्यक्तिगत तौर पर मैं इसके खिलाफ हूँ। आमतौर पर हिजाब को एक धार्मिक घूंघट माना जाता है। जब महिला किसी बाहरी पुरुष की उपस्थिति में अपना सिर ढंक लेती है। हालांकि पर्दा प्रथा भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है। वेदों, पुराणों और संहिताओं में पर्दा प्रथा का कोई विवरण नहीं मिलता, फिर भी पर्दा यहां मान्यता प्राप्त है।

हिजाब विवाद का भगवाकरण:

एक फरवरी को विश्व हिजाब दिवस मनाया जाता है। इस दिवस के प्रचलन का बहुत छोटा समयकाल है। पहली बार 2013 में मनाया गया था। कर्नाटक में हिजाब पहनने को लेकर पिछले महीने विवाद हो गया। जब उडुपी जनपद के एक कॉलेज में कुछ लड़कियों को हिजाब पहनने की वजह से कालेज के अंदर जाने से रोक दिया गया। इस्लामी शास्त्र कुरान मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं को शालीन तरीके से कपड़े पहनने का निर्देश देता है। दासियों और वेश्याओं को घूंघट करने की सख्त मनाही थी, ऐसा करने पर उन्हें कठोर दंड दिया जाता था। कर्नाटक में हिजाब मामले पर राजनीति तो तब शुरू हुई जब कुछ लड़के उसी कालेज में कंधे पर भगवा गमछा डालकर कालेज पहुंच गए, और कहा कि यदि लड़कियों को हिजाब पहनने दिया गया तो हम भी भगवा गमछा डालेंगे और देश भर में हिजाब के औचित्य बहस शुरू हो गई।

परंपरा प्राचीन इस्लाम संस्कृति का हिस्सा:

महिलाओं को पर्दे में रखने की परंपरा इस्लाम संस्कृति में ही है, जो प्राचीन मेसोपोटामिया सभ्यता से जुड़ी है। ग्रीक और फारसी साम्राज्यों में कुलीन परिवारों में सम्मान के रूप में घूंघट पहना जाता था। भारत में घूंघट (पर्दा) की शुरुआत 12वीं सदी में इस्लामी आक्रमण के समय बचाव के लिए हिंदू महिलाएं पर्दा करने लगीं। मुगल काल में इस प्रथा को और बढ़ावा मिला। कुछ मुस्लिम विद्वानों का मानना है कि इस्लामी कानून में हिजाब अनिवार्य है। अफगानिस्तान में पर्दा प्रथा का पालन बहुत ही सख्ती से किया जाता है, जहां महिलाओं को हर समय पूर्ण पर्दा करना पड़ता था। तालिबान की हुकूमत में इस पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

स्त्रियों में पर्दा को शराफत मानते थे गांधी जी:

किसी समय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी महिलाओं के पहनावे पर सलवार के पक्ष में 'फतवा' दिया था।1949 में  में 'सर्वोदय' में उनकी एक 'बातचीत' प्रकाशित हुई थी। उसमें उनका कहना है कि 'स्त्रियों के लिए पंजाब की पोशाक सबसे अच्छी है। कुर्त्ता, दुपट्टा तथा सलवार में कला है और उसमें स्त्री का अंग-अंग शराफत से ढंका रह सकता। दुपट्टे में जहां कला है, वहां जाड़े के दिनमें वह बड़ी कामकी चीज भी है। उससे बड़ा आराम रहता है। कुर्त्ता सारे शरीर को ढंक लेता है और बड़ी शोभा देता है।'

यूरोपीय देशों में हिजाब पर प्रतिबंध:

दुनिया में कुछ सरकारें हिजाब पहनने के लिए बाध्य करती हैं तो कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। फ्रांस ने 2004 से स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध लगया था।  2011 में सार्वजनिक स्थानों पर भी चेहरा ढंकने पर प्रतिबंध लगा दिया। बुल्गारिया में चेहरा ढंकना गैरकानूनी है। जर्मनी में सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनने की अनुमति नहीं है। चीन ने भी हिजाब पर प्रतिबंध लगाया है। ब्रिटेन में भेदभाव को बढ़ाव देने वाले ड्रेस कोड पर प्रतिबंध है। डेनमार्क सरकार ने हिजाब पर कड़ा कानून बनाया है। 12 हजार का जुर्माना भी तय किया है। नीदरलैंड में चेहरा ढकने पर रोक लगी है, यहा चेहरा ढंकने पर जुर्माना देना पकेगा। रूस ने भी हिजाब पर प्रतिबंध लगाया है। बेल्जिम में चेहरा ढकने पर कानूनी कार्रवाई का प्राविधान है।

Friday, 4 February 2022

धर्मयुद्ध का आह्वान

 उदय सिंह

संतों ने धर्म युद्ध का एलान किया है, लेकिन धर्म क्या है, इस सवाल का सटीक जवाब देना शायद मुश्किल है। कोई सत्य को ही धर्म कहता है, तो किसी ने इसे अफीम बताया है। कुछ लोगों का मानना है धर्म धारण करने की चीज है। बौद्धों के अनुसार संपूर्ण जगत क्षणिक पदार्थों का संघात है। जिसे दूसरे शास्त्रकार पदार्थ या भाव शब्द से व्यवहृत करते हैं, बौद्ध लोग उसे ही धर्म कहते हैं। जितने विद्वान उतनी परिभाषाएं हैं। सब अपने तर्क और विश्लेषण पर अडिग। रोम के सम्राट नीरो के पूछने पर उनके शिक्षक लुई एनियस ने बताया कि सामान्य जन धर्म को सत्य के रूप में देखते हैं। बुद्धिमानों के लिए यह मिथ्या है, और शासक इसे उपयोगी मानते हैं। 

 प्रयागराज में विश्व हिन्दू परिषद की ओर से संतों का सम्मेलन आयोजित किया है। जिसमें संतों ने हिन्दू समाज का आह्वान किया है कि पांच राज्यों में हो रहा विधान सभा चुनाव धर्मयुद्ध है। धर्म और अधर्म के बीच लड़ाई छिड़ गई है। इसलिए हिन्दुओं को धर्म की रक्षा करने वाले और संस्कृति का समर्थन करने वाली सरकार चुनना होगा। हालांकि सभी राजनीतिक दलों में हिन्दू ही हैं। संत समाज किसका प्रतिनिधत्व कर रहा है यह तो स्पष्ट है, लेकिन धर्मनिर्पेक्ष देश में किस दल को अधर्मी घोषित कर रहे हैं इसका निर्णय शायद नहीं हुआ है। भारतीय संस्कृति में धर्म का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यह भारतीय संस्कृति का प्राण है। धर्म-दर्शन में धर्म से संबंधित बुनियादी सवालों पर चर्चा की जाती है और सामान्य तौर पर धर्म के स्वरूप की चर्चा की जाती है। 

ईसाइयों ने 1095 और 1291 के बीच पवित्र जेरूसलम स्थित ईसा की समाधि का गिरजाघर मुसलमानों से छीनने के लिए सात बार युद्ध किया था, इसे ही पहला धर्म युद्ध या क्रूसेड युद्ध कहा जाता है। जेरूसलम पर ईसाई, यहूदी और मुसलमान तीनों ही धर्म के लोग आज भी युद्ध जारी रखे हुए हैं। हालांकि दुनिया अधिकतर लोगों का मानना है कि पहला धर्मयुद्ध महाभारत का युद्ध था। 11वीं और 12वीं शताब्दी में भी ईसाई एवं मुसलमानों के बीच धर्म युद्ध हुए। सुलतान सलाद्दीन (1137-1193) के नेतृत्व में उनका बड़ा साम्राज्य अफ्रीका, मिस्र, पश्चिमी एशिया में फिलिस्तीन, सीरिया, अरब, ईरान और इराक तक फेल गया था, जिसका ईसाइयों को हजम नहीं हो रहा था। 

पूरी दुनिया में सैकड़ों धर्म हैं, लेकिन सात धर्मों के लोग ही अधिक हैं। हिन्दू, जैन, बौद्ध, इस्लाम, ईसाई, सिख, यहूदी और पारसी प्रमुख हैं। वुडू और पेगन को धर्म की श्रेणी में रखा जाता है। भारत भूमि अनेक धर्मों तथा सम्प्रदायों की क्रीड़ास्थली है। धार्मिक भाषा का स्वरूप क्या है, धार्मिक विश्वास का आधार क्या है, धर्मों की बुनियादी मान्यताएं क्या हैं और वे कहां तक सत्य या सही हैं इस प्रश्न उत्तर आज भी लोग ढंूढ रहे हैं। सामान्तया बताया यही जाता है कि धर्म शब्द का अर्थ उन सभी सूक्ष्म पृथग्भूत तत्त्वों से है, जो भूत और चित्त में निहित होते हैं और जगत की उत्पत्ति का हेतु है। धर्म, विश्वासों, मूल्यों, आचरण के नियमों और कर्मकांडों की एक व्यवस्था है, जो आस्था पर आधारित है, और जिसका रुझान परलोक या मृत्यु के बाद जीवन की ओर रहता है। 

प्रयागराज में आयोजित सम्मेलन में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सदस्य जगद्गुरु ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती भी शामिल थे। जहां संतों ने धर्म युद्ध का आह्वान किया। और उत्तर प्रदेश में महंत योगी आदित्यनाथ को पुन: मुख्यमंत्री बनाने की हुंकार भरी। अति प्राचीन काल से धर्म को एक पवित्र प्रेरक तत्व के रूप में स्वीकार किया गया। धार्मिक सहिष्णुता का जो आदर्श भारत में  देखने को मिलता है वह विश्व की किसी अन्य संस्कृतियों में दुर्लभ है। प्रत्येक धर्म ने भारतीय संस्कृति के निर्माण में अपना योगदान दिया है। धार्मिक सहिष्णुता, धर्मनिरपेक्षता और मानवतावाद जैसी आधुनिक अवधारणाओं को दरकिनार कर संत सरकार बनाने लिए समाज का जागरण करेंगे।