Friday, 11 October 2024

"अजीब" दास्तां है


उदय सिंह


ये दास्तां थोड़ी अजीब है। वर्ष 1960 में प्रदर्शित फिल्म दिल अपना और प्रीत पराई का गीत ...अजीब दास्तां है ये, नहीं बल्कि चार्ल्स हूपर द्वारा निर्मित एक शतरंज खेलने वाली "ऑटोमेटन" मशीन "अजीब" की दास्तां है। जिसे 1865 में ब्रिस्टल कैबिनेट निर्माता चार्ल्स हूपर ने बनाया था। दुनिया के अनेक महान शतरंज और चेकर्स मास्टर्स ने इसका संचालन किया। अजीब आकार में 10 फीट ऊंचा था। सबसे पहले 1868 में लंदन के रॉयल पॉलिटेक्निकल इंस्टीट्यूट में इसको प्रदर्शित किया गया था। 1868 और 1876 के बीच क्रिस्टल पैलेस में रखा गया। इसके बाद 1877 तक वेस्टमिंस्टर के आकर्षक रॉयल एक्वेरियम की शोभा बढ़ाया। बहुत जल्द ही यूरोप में इसकी मकबूलियत फैल गई और जर्मनी की राजधानी बर्लिन तक पहुंची गई, जहां सिर्फ तीन महीने के अंदर ही एक लाख से अधिक लोगों ने इसका दीदार किया। 

अजीब नाम अरबी शब्द  से लिया गया है। जिसका अर्थ है "अद्भुत"। यह सचमुच अद्भुत था। अजीब के ऑपरेटरों में एक शतरंज और चेकर्स मास्टर्स कॉन्स्टेंट फर्डिनेंड ब्यूरिल थे। 1885 में जब अजीब न्यूयॉर्क आया तो वह भी इसके ऑपरेटर थे। ब्यूरिल पेरिस में जन्मे अमेरिकी शतरंज मास्टर थे। ऑपरेटर के रूप में उन्होंने शतरंज के 900 से अधिक खेल खेले, केवल 3 गेम हारे। इसके अलावा उन्होंने कभी भी एक भी चेकर गेम नहीं हारा। 1889 में न्यूयॉर्क शहर में 15वां स्थान प्राप्त किया (छठी अमेरिकी शतरंज कांग्रेस मिखाइल चिगोरिन और मैक्स वीस द्वारा जीती)। अमेरिकी चेकर्स चैंपियन चार्ल्स बार्कर ने भी अजीब पर काम किया और एक भी गेम नहीं हारे। अमेरिकी राष्ट्रपति भी अजीब के आकर्षण से बच नहीं पाए। 22वें और 24वें अमेरिकी राष्ट्रपति का पद को सुशोभित करने वाले स्टीफन ग्रोवर क्लीवलैंड ने भी अजीब को खेला। 

अरबी में शतरंज का पहला उल्लेख 720 में अरबों के सबसे महान शास्त्रीय कवियों में शुमार अल-फ़राज़दक की रोमांटिक कविताओं में मिलता है। कहते हैं फ़ारसी चतरंग का अरबीकृत नाम शतरंज बन गया। खैर, शतरंज को छोड़िए, अजीब की बात करते हैं। एक बार प्रतिद्वंद्वी ने गेम हारने के बाद अजीब पर गोली चला दी और उसका ऑपरेटर घायल हो गया। जब अजीब को न्यूयॉर्क के ईडन म्यूसी में प्रदर्शित किया गया तो इसका काफी विरोध भी हुआ। विरोधियों में अमेरिकी राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट भी शामिल थे। हंगरी मूल के अमेरिकी बाज़ीगर, स्टंट कलाकार और सनसनीखेज कारनामों के लिए प्रसिद्ध हॅरी हुडीनी, अमेरिकी लेखक विलियम सिडनी पोर्टर (ओ हेनरी) भी विराधियों में थे। 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी के शुरुआती दशकों की एक फ्रांसीसी मंच मशहूर अभिनेत्री सारा बर्नहार्ट को अजीब रास नहीं आया था उन्होंने भी इसका सार्वजनिक विरोध किया। इतने विरोध का सामना करते हुए आखिर 1929 में न्यूयॉर्क शहर के ब्रुकलिन नगर के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित कोनी द्वीप पर आग लगने से अजीब नष्ट हो गया, और इतिहास बन गया।

Thursday, 21 March 2024

काशी की होली और दुनिया की होली

उदय सिंह

त्योहार जीवन में नया जोश लाते हैं। पुरानी स्मृतियों को ताजा करते हैं, और चिंताओं को कुछ समय लिए भुला देते हैं। होली भी ऐसा ही त्योहार है, जो भारत के अलावा दुनिया के कई हिस्सों में मनाया जाता है।इनमें गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगोमॉरीशस, फिजी और दक्षिण अफ्रीका प्रमुख है। भारतीय मूल के कुछ अन्य कैरेबियाई समुदायों में भी बड़े उत्साह से मनाया जाता है। पड़ोसी मुल्‍क नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी हिंदू  होली मनाते हैं। होली का वर्णन न जाने कितने ग्रन्थों में आया है। इसमें सभी लोग एक दूसरे को चंदन, गुलाल, रंग और अबीर लगाते हैं। वसंत की ऋतु में मनाए जाने की वजह से होली को वसंतोत्सव भी कहा जाता है।

काशी में एक विचित्र होली मनाई जाती है। "मसाने की होली" इसे भगवान शिव महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चिताओं के भस्म से अपने गणों, भूत-प्रेत, पिशाच, यक्ष, गंधर्वों और जीव जंतुओं के साथ खेलते हैं। पुराणानुसार यक्ष सुयशा और प्रचेता की संतान हैं, इनकी आकृति विकराल होती है इनमें बोसासियस, इंदारियास, बोननस, मेनोगियास और अलाटस प्रमुख हैं। गणों में भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, जय और विजय प्रमुख थे। गंधर्व दो प्रकार के माने गए हैं ये सोमरस के रक्षक, रोगों के चिकित्सक, सूर्य के अश्वों के वाहक, तथा स्वर्गीय ज्ञान के प्रकाशक माने गए हैं। यम और यमी के उत्पादक भी गंधर्व ही कहे गए हैं। ये सभी शिव के साथ मसाने की होली खेलते हैं। इसके बाद सब लोग उल्लास और उमंग से होली खेलते हैं।

हिंदुओं के त्योहार में आनंद है, जिसमें सभी तरह की प्रवृत्तियों और मनोवृतियों की अभिव्यक्ति परिलक्षित होती है। होलिका या होली हिंदुओं का एक बड़ा त्यौहार है। यह फाल्गुन महीने की अंतिम तारीख पूर्णिमा को देश के सभी हिस्सों में मनाया जाता है। इसी दिन एक मंवन्तर का आरम्भ होने से इसे मन्वादि भी कहते हैं। बीते हुए संवत का अंतिम दिन और आगामी संवत का प्रथम दिन दोनों इस उत्सव में शामिल हैं। होली प्रेम और सौहार्द्र का उत्सव है। अपनी परंपरा और संस्कृति को जीवित रखने के लिए इन उत्सवों का कायम रहना लाजिमी है। होली की उत्पत्ति के संबंध में कई तरह की बातें प्रसिद्ध हैं। पुराणों के अनुसार राक्षसराज हिरण्यकशिपु अपनी बहन होलिका को आदेश देता है कि उसके विष्णुभक्त बेटे प्रह्लाद को गोद में बैठाकर आग में भस्म कर दे, लेकिन वह स्वयं भस्म हो जाती है। कथानुसार गोद में बालक प्रह्लाद को लेकर होलिका की मूर्ति रख दी जाती है। निश्छल, निर्मल एवं निर्दोष भक्त प्रह्लाद होली की भीषण अग्निज्वालाओं के बीच भी पूरी तरह सुरक्षित रहेगा, यह आस्था अत्यंत मूल्यवान है। लेकिन भारतीय मन तो यही मानकर आश्वस्त होता है कि होली के साथ उसने पुराने संवत को भी जला दिया है।

होली त्‍योहार केवल हिन्‍दुस्‍तान ही नहीं बल्कि दुनिया के अनेक देशों में कुछ परिवर्तित रूप में देखने को मिला है। विश्‍व के प्राचीन देशों में शुमार यूनान की राजधानी एथेंस के शहर गैलेक्सिडी में कार्निवल सीजन की विदाई पर आटा से होली खेलने जैसी परंपरा है। यहां लोग एक-दूसरे पर आटा फेंककर जश्न मनाते हैं। रोम में भी होली सरीखा ही रेडिका त्‍योहार मनाया जाता है। इसमें लोग लकड़ियां एकत्रित करके उसे जलाते हैं। यह कमोवेश होलिका दहन जैसा ही नजारा होता है। इस दौरान लोग नाचते गाते हैं और मस्ती करते हैं। फन फेस्टिवल के रूप में एक दूसरे पर संतरे फेंकते हुए होली खेली जाती है। सांस्‍कृति रूप से मजबूत स्‍पेन में मनाया जाने वाला त्‍योहार बटाला डी विनो (शराब की लड़ाई) भी होली की याद दिलाता है। लोग एक दूसरे पर वाइन फेंकते हैं। टोमाटीना फेस्टिवल तो बिलकुल होली का ही अलग रूप है। दक्षिण कोरिया में बोरयॅान्ग मड फेस्टिवल मनाया जाता है। जिसमें लोग एक दूसरे पर कीचड़ फेंकते हैं। एक दूसरे को कीचड़ के टब में फेंकते हैं। ऑस्ट्रेलिया में वाटरमेलन फेस्टिवल (तरबूज) होता है। इसमें एक दूसरे पर तरबूज फेंकते हैं और मस्ती हैं। अप्रैल के महीने में ही थाईलैंड में 'सोंगक्रान' नाम से फेस्टिवल का आयोजन होता है जिसमें लोग एक दूसरे के ऊपर रंग और ठंडा पानी फेंकते हैं। साउथ अफ्रीका में तो होली धूमधाम से मनाया जाता है। होलिका जलाई जाती है और एक दूसरे को रंग भी लगाया जाता है।