Tuesday, 16 November 2021

भीख वाली आज़ादी में दबी कंगना की राजनीतिक महत्वाकांक्षा


 पद्मश्री से सम्मानित अभिनेत्री कंगना रनौत ने 1947 में मिली भारत की आजदी को "भीख" बताया है, असली आजादी 2014 में मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनीं। यह देश की एकता और अखंडता को कलुषित करने वाला अविचारपूर्ण निरर्थक बयान है। आलोचना के बाद अभिनेत्री ने सवाल भी खड़ा किया है कि 1947 में कौन सी लड़ाई हुई थी जिसे आजादी कहेंगे। वह ऐसा क्यों कह रही हैं, इस समय क्यों कह रही हैं यह सब समझने की बात है। क्या वह "भीख" वाली आजादी के बहाने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा जाहिर कर रही हैं या फिर चुनावी बहार में नया "मुद्दा" बना रही हैं। ताकि देश के अन्य मुद्दों पर धूल चढ़ जाए। बेहतर होता कि अभिनेत्री यह सवाल पद्मश्री सम्मान प्राप्त करते समय स्वयं पूछ लेंती, या फिर प्रतिवर्ष 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का जब सम्बोधन होता है, तब पूछ लेतीं।

 15 अगस्त 1947 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लाल किले पर भाषण दिया था तब से आज तक इसी स्थान पर देश का प्रधानमंत्री आजादी के उपलक्ष्य में देश की जनता को सम्बोधित करते हैं। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर इन दिनों देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। 12 मार्च 1930 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह की शुरुआत की थी। पिछले साल 2020 में नमक सत्याग्रह के 91 वर्ष पूरे हुए हैं। इसी लिए प्रधानमंत्री मोदी ने साबरमती आश्रम से अमृत महोत्सव की शुरुआत की, जो 15 अगस्त 2023 तक मनाया जाएगा।

कांग्रेसी नेताओं अलावा भारतीय जनता पार्टी से ही अटल बिहारी वाजपेयी भी इस देश में तीन बार प्रधानमंत्री बने, पहली बार 1996 में 13 दिनों के लिए। दूसरी बार 1998 से 1999 तक 13 महीने लिए और उसके बाद 1999 से 2004 तक प्रधानमंत्री रहे। क्या तब अभिनेत्री को यह देश आजाद नहीं लग रहा था या वह आजादी महसूस नहीं कर रही थीं। " तथाकथित राष्ट्रवाद" का ढोल पीटने वाले भी इस बयान पर कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं। यह सोचने वाली बात है। हालांकि महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने ज़रूर अभिनेत्री की टिप्पणी को पूरी तरह से गलत है। भाजपा सांसद वरुण गांधी ने भी ट्वीटर पर नाराजगी जाते हुए लिखा कि इस सोच को पागलपन कहूं या देशद्रोह।

दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर कंगना रनौत की पद्मश्री को वापस लेने का आग्रह किया। साथ ही कंगना रनौत के खिलाफ देशद्रोह के आरोप में केस दर्ज करने की मांग की है। इस पर अभी तक कोई सरकारी प्रतिक्रिया भी देखने को नहीं मिली है। कंगना को समझना चाहिए कि देश की आज़ादी के लिए केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने आजादी का अमृत महोत्सव मोबाइल ऐप भी लांच किया है। जहां भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाने से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होगी।

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के भम्ब्ला गांव में पैदा हुई कंगना सचमुच इतिहास को जानने के लिए बौद्धिक कसरत दिखाएं तो उन्हें सहज ही मालूम हो जाएगा कि उनके सूबे में ही अनंत राम, जगदीश सिंह, ठाकुर दास, धनि राम, लक्ष्मण दास, ठाकुर वरयाम सिंह, वतन सिंह, ख़ुशी राम, गोपी राम, जमना देवी, लक्ष्मण दास ने आजदी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

1857 के विद्रोह को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम बताने वाली अभिनेत्री यदि इतिहासकारों को पढ़ें तो अनेक जानकारी हासिल कर सकेंगी। आरसी मजुमदार, विपिन चन्द्र जैसे प्रसिद्ध इतिहासकारों ने इस पर खूब लिखा है। 1857 को लेकर मजुमदार  ने अपनी पुस्तक sepoy mutiny and the revolt में विस्तारपूर्वक स्पष्ट किया है। उसका अनुरोध है यह महासंग्राम नहीं बल्कि अलग अलग स्थानों पर यह भिन्न-भिन्न रूप में था। लार्ड डलहौजी की राज्यों को हड़पने की नीति डाक्ट्रिन ऑफ लैप्स के तहत अवध, झांसी, नागपुर, सतारा और संबलपुर को ब्रिटेन की ईस्ट इंडिया कंपनी में मिला लिया। ऐसे में यह सभी अंग्रेजों के हाथों शर्मिंदगी और हार का बदला लेने के लिए यह 1857 से समर में कूदने को तैयार हुए।

अभिनेत्री ने देश के विभाजन के साथ ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी लपेटे में ले लिया है। महात्मा गांधी ने भगत सिंह को मरने क्यों दिया। नेताजी बोस की हत्या क्यों की गई। इन सभी विषयों पर ऐसे अविवेकपूर्ण बयान से देश के प्रतिभाशाली युवाओं में बुद्धिभेद और आज़ादी को लेकर स्थापित विचार में विरोधाभास की समस्या खड़ी हो सकती है। देश के हजारों विश्वविद्यालयों में भारतीय इतिहास बढ़ा रहे प्रोफेसर और शिक्षकों को अभिनेत्री कंगना की चुनौती स्वीकार कर अपने विशालहृदयता और उदारता का परिचय देना चाहिए।

1 comment:

  1. Actress needs to jump out from silver screen characters...,just to understand history & geography of country, inspite of creating sensetion & controversy.

    Her previous statements like
    "UKHAAD LENA" shows her nonsense behaviour but not Symbol of courage by any means.
    Actually she received many undue recognitions , which she never deserves...

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