Saturday, 12 March 2022

सत्याग्रह और राजनीति का "नमक"


 उदय सिंह


मरहम के नहीं हैं ये तरफ़-दार नमक के 

निकले हैं मिरे ज़ख्म तलबगार नमक के, 

आया कोई सैलाब कहानी में अचानक 

घुल गए पानी में वो किरदार नमक के। 

टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले "द पंजाबी तड़का" के मशहूर शेफ हैं, हरपाल सिंह सोखी। उनका एक तकिया कलाम है नमक शमक, नमक शमक डाल देते हैं...। व्यंजन में नमक का महत्व जिस सलीके बताते हैं वह काबिले तारीफ है। देश की आजादी से पहले से ही नमक अपनी अहमियत के लिए समय समय पर चर्चा में रहा है। भोजन के अलाव वास्तुशास्त्र में भी नमक को उपयोगी माना गया है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी नमक पड़ गया, और चुनाव का जायका दिया। आज ही दिन ठीक 92 वर्ष पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह की शुरुआत कर अंग्रेजों के बनाए नमक कानून को तोड़ा था। जिसे हम लोग दांडी मार्च कहते हैं। अभी दो दिन पहले ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ है। इस चुनाव में भी सबसे अधिक नमक खाने की चर्चा रही। चुनाव प्रचार के वक्त यूपी के मैनपुरी में एक वृद्ध महिला का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह बुजुर्ग महिला कृतघ्नता जाहिर करते हुए बोल रही थी कि मैंने प्रधानमंत्री मोदी का नमक खाया है, धोखा नहीं देंगे। आखिर नमक ने अपना असर दिखा दिया। योगी आदित्यनाथ दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे।

मां विंध्यवासिनी जीवनभर चुकाएंगे नमक का कर्ज:

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर की चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नमक का सहारा लिया। कहा, मां विंध्यवासिनी आपने हमारा नमक नहीं खाया है। नमक तो हमने आपका खाया है। उस नमक का जीवनभर कर्ज चुकाता रहूंगा। 12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से 24 दिनों में 390 किलोमीटर पैदल यात्रा कर दांडी पहुंचते हैं और मुट्ठी भर नमक उठाकर अंग्रेजों के बनाए नमक कानून को तोड़ दिया। नमक सत्याग्रह महात्मा गांधी के अहिंसक विरोध के सिद्धांतों पर आधारित था, इसे सत्याग्रह कहा जाता है। अंग्रेजी हुकूमत ने भारतीयों को नमक बनाने का अधिकार नहीं था। दरअसल, वर्ष 1882 नमक अधिनियम के तहत नमक संग्रह के साथ निर्माण पर अंग्रेजों का एकाधिकार हो गया। इसके जरिये नमक बेचने पर भी उन्हीं का अधिकार था। इंग्लैंड से आने वाले महंगे नमक का ही इस्तेमाल भारतीयों को करना पड़ता था, ताकि ब्रिटेन के व्यापारी मालामाल हो सकें। 

कोरोना काल में नमक के भाव आसमान पर,:

देश को आजादी मिले 75 साल हो गए, लेकिन आज भी नमक अपनी कीमतों को लेकर बहस-मुबाहिसा में बना रहता है। गांधी के नमक सत्याग्रह से अमेरिका के अश्वेत आंदोलनकारी मार्टिन लूथर किंग (जूनियर) प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन यहां नेता और व्यापारी नहीं। कोरोना काल में कई प्रदेशों के सुदूर इलाकों में लोगों को 130 रुपये किलो नमक खरीदना पड़ा। यह विदेशी व्यापारी नहीं भारतीय हैं जो नमक बेच कर मनमाना मुनाफा कमाते हैं। सात आठ साल पहले की बात है, बिहार में 100 से 150 रुपये किलो तक नमक बेचा गया, हालांकि सरकार की ओर से इसे अफवाह करार दिया गया। आज नमक सत्याग्रह पर जगह-जगह गोष्ठियां हो रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने आज गुजरात से ट्वीट किया कि आज के ही दिन इसी धरती से दांडी यात्रा की शुरुआत हुई थी। जब गांधीजी ने अंग्रेजी हुकूमत को भारतीयों के सामथ्र्य का एहसास कराया था। काश, इस सामथ्र्य को वह भारतीय व्यापारियों को भी समझा सकते।

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