उदय सिंह
चन्द्रगत भारती की एक कविता है।
अंधेरों की हुकूमत में
अभी तक जी रहा था मैं,
हटाया चांद ने घूंघट तो
उजाला हो गया घर में।
और वफ़ा बराही का एक शेर है।
रुख़-ए-आरज़ू पर हिजाब-ए-मोहब्बत
खिला और इस से शबाब-ए-मोहब्बत।
सिवा यास के मैं ने देखा न कुछ भी
उठाई जब उस ने नक़ाब-ए-मोहब्बत।
घूंघट और हिजाब की शान में ऐसे ही हजारों कविताएं, शेर और गीत लिखे गए हैं, जिसे महिलाओं के लिए अनुशासन और सम्मान का प्रतीक माना गया है। इन दिनों हिजाब पर हंगामा बरपा है। हिजाब पहना सही है या गलत यह विमर्श का विषय है। व्यक्तिगत तौर पर मैं इसके खिलाफ हूँ। आमतौर पर हिजाब को एक धार्मिक घूंघट माना जाता है। जब महिला किसी बाहरी पुरुष की उपस्थिति में अपना सिर ढंक लेती है। हालांकि पर्दा प्रथा भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है। वेदों, पुराणों और संहिताओं में पर्दा प्रथा का कोई विवरण नहीं मिलता, फिर भी पर्दा यहां मान्यता प्राप्त है।
हिजाब विवाद का भगवाकरण:
एक फरवरी को विश्व हिजाब दिवस मनाया जाता है। इस दिवस के प्रचलन का बहुत छोटा समयकाल है। पहली बार 2013 में मनाया गया था। कर्नाटक में हिजाब पहनने को लेकर पिछले महीने विवाद हो गया। जब उडुपी जनपद के एक कॉलेज में कुछ लड़कियों को हिजाब पहनने की वजह से कालेज के अंदर जाने से रोक दिया गया। इस्लामी शास्त्र कुरान मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं को शालीन तरीके से कपड़े पहनने का निर्देश देता है। दासियों और वेश्याओं को घूंघट करने की सख्त मनाही थी, ऐसा करने पर उन्हें कठोर दंड दिया जाता था। कर्नाटक में हिजाब मामले पर राजनीति तो तब शुरू हुई जब कुछ लड़के उसी कालेज में कंधे पर भगवा गमछा डालकर कालेज पहुंच गए, और कहा कि यदि लड़कियों को हिजाब पहनने दिया गया तो हम भी भगवा गमछा डालेंगे और देश भर में हिजाब के औचित्य बहस शुरू हो गई।
परंपरा प्राचीन इस्लाम संस्कृति का हिस्सा:
महिलाओं को पर्दे में रखने की परंपरा इस्लाम संस्कृति में ही है, जो प्राचीन मेसोपोटामिया सभ्यता से जुड़ी है। ग्रीक और फारसी साम्राज्यों में कुलीन परिवारों में सम्मान के रूप में घूंघट पहना जाता था। भारत में घूंघट (पर्दा) की शुरुआत 12वीं सदी में इस्लामी आक्रमण के समय बचाव के लिए हिंदू महिलाएं पर्दा करने लगीं। मुगल काल में इस प्रथा को और बढ़ावा मिला। कुछ मुस्लिम विद्वानों का मानना है कि इस्लामी कानून में हिजाब अनिवार्य है। अफगानिस्तान में पर्दा प्रथा का पालन बहुत ही सख्ती से किया जाता है, जहां महिलाओं को हर समय पूर्ण पर्दा करना पड़ता था। तालिबान की हुकूमत में इस पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
स्त्रियों में पर्दा को शराफत मानते थे गांधी जी:
किसी समय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी महिलाओं के पहनावे पर सलवार के पक्ष में 'फतवा' दिया था।1949 में में 'सर्वोदय' में उनकी एक 'बातचीत' प्रकाशित हुई थी। उसमें उनका कहना है कि 'स्त्रियों के लिए पंजाब की पोशाक सबसे अच्छी है। कुर्त्ता, दुपट्टा तथा सलवार में कला है और उसमें स्त्री का अंग-अंग शराफत से ढंका रह सकता। दुपट्टे में जहां कला है, वहां जाड़े के दिनमें वह बड़ी कामकी चीज भी है। उससे बड़ा आराम रहता है। कुर्त्ता सारे शरीर को ढंक लेता है और बड़ी शोभा देता है।'
यूरोपीय देशों में हिजाब पर प्रतिबंध:
दुनिया में कुछ सरकारें हिजाब पहनने के लिए बाध्य करती हैं तो कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। फ्रांस ने 2004 से स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध लगया था। 2011 में सार्वजनिक स्थानों पर भी चेहरा ढंकने पर प्रतिबंध लगा दिया। बुल्गारिया में चेहरा ढंकना गैरकानूनी है। जर्मनी में सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनने की अनुमति नहीं है। चीन ने भी हिजाब पर प्रतिबंध लगाया है। ब्रिटेन में भेदभाव को बढ़ाव देने वाले ड्रेस कोड पर प्रतिबंध है। डेनमार्क सरकार ने हिजाब पर कड़ा कानून बनाया है। 12 हजार का जुर्माना भी तय किया है। नीदरलैंड में चेहरा ढकने पर रोक लगी है, यहा चेहरा ढंकने पर जुर्माना देना पकेगा। रूस ने भी हिजाब पर प्रतिबंध लगाया है। बेल्जिम में चेहरा ढकने पर कानूनी कार्रवाई का प्राविधान है।

Very Nicely drafted and worked on issues.
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