उदय सिंह
संतों ने धर्म युद्ध का एलान किया है, लेकिन धर्म क्या है, इस सवाल का सटीक जवाब देना शायद मुश्किल है। कोई सत्य को ही धर्म कहता है, तो किसी ने इसे अफीम बताया है। कुछ लोगों का मानना है धर्म धारण करने की चीज है। बौद्धों के अनुसार संपूर्ण जगत क्षणिक पदार्थों का संघात है। जिसे दूसरे शास्त्रकार पदार्थ या भाव शब्द से व्यवहृत करते हैं, बौद्ध लोग उसे ही धर्म कहते हैं। जितने विद्वान उतनी परिभाषाएं हैं। सब अपने तर्क और विश्लेषण पर अडिग। रोम के सम्राट नीरो के पूछने पर उनके शिक्षक लुई एनियस ने बताया कि सामान्य जन धर्म को सत्य के रूप में देखते हैं। बुद्धिमानों के लिए यह मिथ्या है, और शासक इसे उपयोगी मानते हैं।
प्रयागराज में विश्व हिन्दू परिषद की ओर से संतों का सम्मेलन आयोजित किया है। जिसमें संतों ने हिन्दू समाज का आह्वान किया है कि पांच राज्यों में हो रहा विधान सभा चुनाव धर्मयुद्ध है। धर्म और अधर्म के बीच लड़ाई छिड़ गई है। इसलिए हिन्दुओं को धर्म की रक्षा करने वाले और संस्कृति का समर्थन करने वाली सरकार चुनना होगा। हालांकि सभी राजनीतिक दलों में हिन्दू ही हैं। संत समाज किसका प्रतिनिधत्व कर रहा है यह तो स्पष्ट है, लेकिन धर्मनिर्पेक्ष देश में किस दल को अधर्मी घोषित कर रहे हैं इसका निर्णय शायद नहीं हुआ है। भारतीय संस्कृति में धर्म का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यह भारतीय संस्कृति का प्राण है। धर्म-दर्शन में धर्म से संबंधित बुनियादी सवालों पर चर्चा की जाती है और सामान्य तौर पर धर्म के स्वरूप की चर्चा की जाती है।
ईसाइयों ने 1095 और 1291 के बीच पवित्र जेरूसलम स्थित ईसा की समाधि का गिरजाघर मुसलमानों से छीनने के लिए सात बार युद्ध किया था, इसे ही पहला धर्म युद्ध या क्रूसेड युद्ध कहा जाता है। जेरूसलम पर ईसाई, यहूदी और मुसलमान तीनों ही धर्म के लोग आज भी युद्ध जारी रखे हुए हैं। हालांकि दुनिया अधिकतर लोगों का मानना है कि पहला धर्मयुद्ध महाभारत का युद्ध था। 11वीं और 12वीं शताब्दी में भी ईसाई एवं मुसलमानों के बीच धर्म युद्ध हुए। सुलतान सलाद्दीन (1137-1193) के नेतृत्व में उनका बड़ा साम्राज्य अफ्रीका, मिस्र, पश्चिमी एशिया में फिलिस्तीन, सीरिया, अरब, ईरान और इराक तक फेल गया था, जिसका ईसाइयों को हजम नहीं हो रहा था।
पूरी दुनिया में सैकड़ों धर्म हैं, लेकिन सात धर्मों के लोग ही अधिक हैं। हिन्दू, जैन, बौद्ध, इस्लाम, ईसाई, सिख, यहूदी और पारसी प्रमुख हैं। वुडू और पेगन को धर्म की श्रेणी में रखा जाता है। भारत भूमि अनेक धर्मों तथा सम्प्रदायों की क्रीड़ास्थली है। धार्मिक भाषा का स्वरूप क्या है, धार्मिक विश्वास का आधार क्या है, धर्मों की बुनियादी मान्यताएं क्या हैं और वे कहां तक सत्य या सही हैं इस प्रश्न उत्तर आज भी लोग ढंूढ रहे हैं। सामान्तया बताया यही जाता है कि धर्म शब्द का अर्थ उन सभी सूक्ष्म पृथग्भूत तत्त्वों से है, जो भूत और चित्त में निहित होते हैं और जगत की उत्पत्ति का हेतु है। धर्म, विश्वासों, मूल्यों, आचरण के नियमों और कर्मकांडों की एक व्यवस्था है, जो आस्था पर आधारित है, और जिसका रुझान परलोक या मृत्यु के बाद जीवन की ओर रहता है।
प्रयागराज में आयोजित सम्मेलन में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सदस्य जगद्गुरु ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती भी शामिल थे। जहां संतों ने धर्म युद्ध का आह्वान किया। और उत्तर प्रदेश में महंत योगी आदित्यनाथ को पुन: मुख्यमंत्री बनाने की हुंकार भरी। अति प्राचीन काल से धर्म को एक पवित्र प्रेरक तत्व के रूप में स्वीकार किया गया। धार्मिक सहिष्णुता का जो आदर्श भारत में देखने को मिलता है वह विश्व की किसी अन्य संस्कृतियों में दुर्लभ है। प्रत्येक धर्म ने भारतीय संस्कृति के निर्माण में अपना योगदान दिया है। धार्मिक सहिष्णुता, धर्मनिरपेक्षता और मानवतावाद जैसी आधुनिक अवधारणाओं को दरकिनार कर संत सरकार बनाने लिए समाज का जागरण करेंगे।
Well researched and concise expression of thought on bigger canvas like religion.
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